
समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
बच्चों में नैतिक मूल्य, शील और बौद्ध धम्म के संस्कार जागृत करने के उद्देश्य से आयोजित *”बाल धम्म संस्कार शिविर”* रविवार को बल्लारपुर में उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

यह शिविर 16 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 11 बजे से दोपहर 4 बजे तक बालाजी वार्ड स्थित संत तुकाराम महाराज सभागृह में आयोजित किया गया था।

130 बच्चों की रही सहभागिता
6 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं के लिए आयोजित इस शिविर में कुल 130 विद्यार्थियों ने सहभाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत त्रिशरण और पंचशील के साथ हुई। देवप्रिया रामटेके ने मराठी में पंचशील का पठन किया, वहीं वंश कोट्टावार ने विधायक पंचशील प्रस्तुत किया। आराध्या चौधरी, हृदया रामटेके, क्षितिज बोरकर और शाश्वत देवगडे ने बुद्ध पूजा की।
धम्मचारी पद्मरत्न का मार्गदर्शन
शिविर के मुख्य मार्गदर्शक *धम्मचारी पद्मरत्न* ने “सब्ब पापस्स अकरणं, कुसलस्स उपसंपदा, सचित्त परियोदपनं, एतं बुद्धान सासनं” इस बुद्ध वचन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को बताया कि कोई पाप कर्म न करना, कुशल कर्म करना और मन की शुद्धि करना ही बुद्ध की मूल शिक्षा है। उन्होंने अपने ओजस्वी शब्दों में बच्चों को यह उपदेश आत्मसात करने का आह्वान किया।

दूसरे सत्र में धम्ममित्र दर्शना रामटेके ने बच्चों से मैत्री भावना ध्यान का अभ्यास कराया। इसके बाद समूह चर्चा, खेल और बच्चों ने अपने मन के विचार भी व्यक्त किए।
आयोजन और सहयोग
कार्यक्रम का संचालन धम्ममित्र भास्कर भगत ने किया। संपत कोरडे ने प्रास्ताविक और जयदास भगत ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का समापन धम्मपालन गाथा के साथ हुआ।
इस शिविर को सफल बनाने में लोहेश्वर जुमडे, किशोर लोनारे, रवि कांबळे, अरुण गावंडे, गोकुल वाघमारे, प्रकाश देवगडे, नितिन धाबर्डे, तुलसीदास खैरे, अंबादास मानकर, परमानंद भडके, राहुल साव, मंगेश रामटेके, विजय कांबळे* सहित कई धम्ममित्रों ने सहयोग किया।



